
द्वादशाक्षर लक्ष्मी यंत्र
कुल प्रचुरता, पूर्ण कृपा और बहु-आयामी समृद्धि
द्वादशाक्षर लक्ष्मी यंत्र देवी लक्ष्मी के पूर्ण, 12-अक्षर के आह्वान का प्रतिनिधित्व करता है - जो लक्ष्मी पूजा का सबसे व्यापक रूप है। यह सभी आयामों में प्रचुरता को आकर्षित करता है: भौतिक, आध्यात्मिक, संबंधपरक और शारीरिक, जो इसे लक्ष्मी संग्रह में सबसे समग्र यंत्र बनाता है।
प्राथमिक लाभ:
व्यापक, बहु-आयामी प्रचुरता को आकर्षित करता है, आध्यात्मिक कृपा और धर्मिक जीवन के साथ धन का सामंजस्य स्थापित करता है, घर या कार्यालय में समृद्धि का एक सर्वव्यापी क्षेत्र बनाता है, और उन लोगों के लिए पसंदीदा यंत्र है जो आध्यात्मिक समझौते के बिना धन चाहते हैं।
मूल मंत्र: || ओम श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ओम ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौं नमः ||
(12-अक्षर द्वादशाक्षर)
विनिर्देश: 4 इंच | 90+ ग्राम | 95%+ शुद्ध तांबा | 1 मिमी+ मोटाई | प्रमाणित वैदिक डिज़ाइन | त्राटक संगत
सार्वभौमिक विशेषताएँ — द्वादशाक्षर लक्ष्मी यंत्र (4" यंत्र)
• आकार: 4 इंच × 4 इंच (10.16 × 10.16 सेमी)
• वजन: 90–95 ग्राम
• सामग्री: 95%+ शुद्ध इलेक्ट्रोलाइटिक कॉपर (उद्योग-ग्रेड, मिश्र धातु नहीं)
• मोटाई: 1 मिमी+ (इंजीनियर्ड, फॉयल-प्रेस्ड नहीं)
• फिनिश: मैट फिनिश के साथ प्राकृतिक तांबा। सामग्री की शुद्धता प्रदर्शित करने के लिए पीछे का हिस्सा कच्चा रखा गया है — कोई कोटिंग या प्लेटिंग नहीं।
• डिज़ाइन: प्रमाणित वैदिक ज्यामिति — योग्य गुरुओं द्वारा पारंपरिक यंत्र शास्त्र मानकों के अनुसार सत्यापित अनुपात
• त्राटक रेटिंग: पूरी तरह से संगत — स्थिर-दृष्टि अभ्यास के लिए सटीक समरूपता
• स्थापन: [दिशा] — उपयोग कैसे करें अनुभाग देखें
• मंत्र: [मंत्र]
• उत्पत्ति: भारत में निर्मित
• निर्माता: लखलानी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, पुणे, महाराष्ट्र
• जीएसटी: जीएसटी-अनुपालक। ऑर्डर के साथ चालान प्रदान किया जाएगा
• एमएसएमई: एमएसएमई-पंजीकृत। स्टार्टअप इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त
• वारंटी: आजीवन सामग्री गुणवत्ता गारंटी — हम अपने तांबे के प्रति प्रतिबद्ध हैं
• बॉक्स में: 1 × द्वादशाक्षर लक्ष्मी यंत्र | देखभाल के निर्देश | मंत्र कार्ड
अपने द्वादशाक्षर लक्ष्मी यंत्र को सक्रिय और उपयोग कैसे करें
- सफाई:
यंत्र को साफ पानी (गंगाजल बेहतर है) से धीरे से धोएं। एक मुलायम सूती कपड़े से सुखा लें। साबुन या रासायनिक क्लीनर का उपयोग न करें। - सक्रियण (प्राण प्रतिष्ठा):
अपने वेदी पर लाल या पीले कपड़े पर रखें। घी का दीपक और धूप जलाएं। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें (या धन यंत्रों के लिए उत्तर की ओर)। मूल मंत्र का 108 बार जाप करें, जबकि अपनी दृष्टि को धीरे से केंद्रीय बिंदु पर केंद्रित रखें: - स्थापन:
इसे अपने घर या कार्यालय में अनुशंसित दिशात्मक स्थिति में रखें। यंत्र का मुख पूर्व की ओर होना चाहिए और बैठे होने पर आंखों के स्तर पर या थोड़ा ऊपर होना चाहिए। - दैनिक अभ्यास:
ताजे फूल चढ़ाएं, धूप जलाएं और मूल मंत्र का प्रतिदिन 11 या 108 बार जाप करें। निरंतर ऊर्जावान अनुनाद के लिए एक संक्षिप्त 5 मिनट का दैनिक अभ्यास भी पर्याप्त है। - त्राटक ध्यान:
यंत्र से 1.5-2 फीट की दूरी पर बैठें। केंद्रीय बिंदु पर बिना पलक झपकाए, जितनी देर तक आरामदायक हो, धीरे से देखें। 1-2 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। इस अभ्यास के लिए अद्वर ज्यामिति को सटीकता से कैलिब्रेट किया गया है।
देखभाल:
मासिक रूप से एक मुलायम सूखे कपड़े से पोंछें। तांबे पर प्राकृतिक पेटिना विकसित होता है - यह सामान्य है और ऊर्जावान गुणों को प्रभावित नहीं करता है। अपघर्षक क्लीनर का उपयोग न करें।
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