
उन्नत चंद्र यंत्र
भावनात्मक सामंजस्य, मानसिक शांति और वास्तु सुधार — उत्तर-पश्चिम दिशा
चंद्रमा मन, भावनाओं और घर में माँ के पोषणकारी स्वरूप को नियंत्रित करता है। चंद्रमा का दूषित प्रभाव या उत्तर-पश्चिम दिशा में वास्तु असंतुलन परिवेश में भावनात्मक अस्थिरता, रिश्तों में मनमुटाव और मानसिक अशांति का कारण बन सकता है।
चंद्र (चंद्रमा) यंत्र, जब उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में रखा जाता है, तो स्थान में चंद्र संतुलन और भावनात्मक सामंजस्य को बहाल करने में मदद करता है। उच्च-शुद्धता वाले तांबे से बना, यह शांत चंद्र ऊर्जा का विकिरण करता है जो पूरे घर या कार्यस्थल में मन की शांति, भावनात्मक लचीलापन और सहायक संबंधों को बढ़ावा देता है।
मंत्र ध्यान
|| ओम श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः ||
विशेष विवरण
| आकार | 6 इंच |
| वजन | 90+ ग्राम |
| सामग्री | 95%+ शुद्ध तांबा |
| मोटाई | 1मिमी+ |
| स्थापन | उत्तर-पश्चिम दिशा |
| उद्देश्य | वास्तु सुधारात्मक यंत्र |
सार्वभौमिक विशेषताएँ — उन्नत चंद्र यंत्र (4" यंत्र)
• आकार: 4 इंच × 4 इंच (10.16 × 10.16 सेमी)
• वजन: 90–95 ग्राम
• सामग्री: 95%+ शुद्ध इलेक्ट्रोलाइटिक कॉपर (उद्योग-ग्रेड, मिश्र धातु नहीं)
• मोटाई: 1 मिमी+ (इंजीनियर्ड, फॉयल-प्रेस्ड नहीं)
• फिनिश: मैट फिनिश के साथ प्राकृतिक तांबा। सामग्री की शुद्धता प्रदर्शित करने के लिए पीछे का हिस्सा कच्चा रखा गया है — कोई कोटिंग या प्लेटिंग नहीं।
• डिज़ाइन: प्रमाणित वैदिक ज्यामिति — योग्य गुरुओं द्वारा पारंपरिक यंत्र शास्त्र मानकों के अनुसार सत्यापित अनुपात
• त्राटक रेटिंग: पूरी तरह से संगत — स्थिर-दृष्टि अभ्यास के लिए सटीक समरूपता
• स्थापन: [दिशा] — उपयोग कैसे करें अनुभाग देखें
• मंत्र: [मंत्र]
• उत्पत्ति: भारत में निर्मित
• निर्माता: लखलानी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, पुणे, महाराष्ट्र
• जीएसटी: जीएसटी-अनुपालक। ऑर्डर के साथ चालान प्रदान किया जाएगा
• एमएसएमई: एमएसएमई-पंजीकृत। स्टार्टअप इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त
• वारंटी: आजीवन सामग्री गुणवत्ता गारंटी — हम अपने तांबे के प्रति प्रतिबद्ध हैं
• बॉक्स में: 1 × उन्नत चंद्र यंत्र | देखभाल के निर्देश | मंत्र कार्ड
अपने उन्नत चंद्र यंत्र को सक्रिय और उपयोग कैसे करें
- सफाई:
यंत्र को साफ पानी (गंगाजल बेहतर है) से धीरे से धोएं। एक मुलायम सूती कपड़े से सुखा लें। साबुन या रासायनिक क्लीनर का उपयोग न करें। - सक्रियण (प्राण प्रतिष्ठा):
अपने वेदी पर लाल या पीले कपड़े पर रखें। घी का दीपक और धूप जलाएं। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें (या धन यंत्रों के लिए उत्तर की ओर)। मूल मंत्र का 108 बार जाप करें, जबकि अपनी दृष्टि को धीरे से केंद्रीय बिंदु पर केंद्रित रखें: - स्थापन:
इसे अपने घर या कार्यालय में अनुशंसित दिशात्मक स्थिति में रखें। यंत्र का मुख पूर्व की ओर होना चाहिए और बैठे होने पर आंखों के स्तर पर या थोड़ा ऊपर होना चाहिए। - दैनिक अभ्यास:
ताजे फूल चढ़ाएं, धूप जलाएं और मूल मंत्र का प्रतिदिन 11 या 108 बार जाप करें। निरंतर ऊर्जावान अनुनाद के लिए एक संक्षिप्त 5 मिनट का दैनिक अभ्यास भी पर्याप्त है। - त्राटक ध्यान:
यंत्र से 1.5-2 फीट की दूरी पर बैठें। केंद्रीय बिंदु पर बिना पलक झपकाए, जितनी देर तक आरामदायक हो, धीरे से देखें। 1-2 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। इस अभ्यास के लिए अद्वर ज्यामिति को सटीकता से कैलिब्रेट किया गया है।
देखभाल:
मासिक रूप से एक मुलायम सूखे कपड़े से पोंछें। तांबे पर प्राकृतिक पेटिना विकसित होता है - यह सामान्य है और ऊर्जावान गुणों को प्रभावित नहीं करता है। अपघर्षक क्लीनर का उपयोग न करें।
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